The author of this blog stopped writing here long time back. The posts published here embarrass her now. And hence, there is very little chance that she is going to write here again.

This blog is hence declared to be in a state of COMA.

"Dard" : A Short Scene


{First-level auditions of a famous reality T.V show are on in full swing. The stage is set for the next contestant to take over. A large studio audience is present. The orchestra is ready to play along. The jury—a panel of two eminent musicians of the Hindi Music Industry (one male, one female)—too is ready. The jury is sitting right in front, with the audience at the back, both facing the stage. The contestant enters from the left entry point on the stage with a harmonium hung around his neck. He is dressed in old but traditional Rajasthani attire—pagri, angrakha, dhoti and kamarbandh. He is barefoot, and in a respectful gesture, bends to touch the stage before stepping on it.}

Contestant: (nervously) नमस्ते sir.

Judge 1: (with a keen look and a generous smile) नमस्ते, नमस्ते। क्या नाम है आपका?

Contestant: जी, भानुप्रसाद।

Judge 2: भानुप्रसाद जी, सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहूँगी कि I love what you're wearing!

Bhanu: (clueless expression) 

Judge 2: मेरे कहने का मतलब है कि आप जो ये पारम्परिक राजस्थानी पोशाक पहन के आये हैं आज, मुझे बहुत अच्छी लगी।

Bhanu: (blushes) जी, धन्य्वाद madamji.

Judge 1: भानुप्रसाद जी, आप करते क्या हैं?

Bhanu: Sir मै बसों और ट्रेनों में गाना गाता हूँ, अपना ये बाजा बजाता हूँ और लोगों का मनोरंजन करता हूँ।

Judge 2: Interesting. (To judge 1) I am so glad to see that our show is attracting such diversity of musicians from across the country!

Judge 1: I completely agree with you. (To Bhanu) हाँ तो भानु जी, क्या सुनाएंगे आज आप?

Bhanu: Sir मैं हमारे राजस्थान का ही एक बड़ा मशहूर लोक गीत है, केसरिया बालम, वही सुनाने की इजाज़त चाहूँगा।

Judge 1: अरे बिल्कुल। बस शुरू हो जाइये ! (To audience) Silence please!


(Bhanu starts with an aalaap. He sings the song, "Kesariya baalam aawo rey" for a total of 1.5 minutes, while playing his harmonium along. He starts nervously but slowly becomes more confident in his singing. The audience is clapping and cheering for him by the end of the performance. The judges are very happy too. At the end of the performance...)


Judge 2: भानु जी! कितनी सुन्दर अवाज़ है आपकी! बिलकुल राजस्थान की मिट्टी की याद दिला दी। वाक़ई, मज़ा आ गया आज आपका performance देख़ के।  

Bhanu: (extremely excited) धन्यवाद madam ji, आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

Judge 1: भानु जी आपकी आवाज़ में जो प्यार, जो भावनाएं हैं, वो सिर्फ हमारे लोक गीत में ही सुनाई पड़ सकती हैं। और harmonium तो आप और भी सुन्दर बजाते हैं। बहुत ख़ुशी हुई आज आपका गाना सुनके। 

Bhanu: Sir... मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा। मेरे लिए तो आप जैसे दिग्गज लोगों के सामने खड़ा होना ही बहुत बड़ी बात है। आपसे तारीफ सुनकर तो मेरा जीवन सफ़ल हो गया। (kneels in gratitude with teary eyes)

Judge 2: सफ़ल तो हमारा दिन हो गया भानु जी, आपका गाना सुनके। आपका शुक्रिया यहाँ आने के लिए। 

Judge 1: भानु जी, buses और trains में गाकर लगभग कितना कमा लेते हैं आप?

Bhanu: Sir कभी तो दिनभर गाके भी एक रुपया पास नहीं बचता, और कभी दिन के पचास-सौ रुपये तक बन जाते हैं।

Judge 2: तो आपका गुज़ारा हो जाता है इतने में? परिवार में कितने लोग हैं?

Bhanu: Madam ji परिवार में तो बस मै हूँ और मेरी माँ हैं जो ज़्यादातर बीमार रहती हैं। यूँ तो जितना मै कमाता हूँ उतने में गुज़ारा कर सकते हैं, पर माँ की दवाइओ के कारण कुछ बचता नहीं। हमारे पूर्वज भी यही काम करते थे। जो भी कला हमें आती हैं, वो हमें पिताजी से मिली है। संगीत हमारे रोम रोम में बसा है, संगीत के अलावा तो शायद हम कुछ कर भी नहीं सकते। हम ख़ुद को ख़ुश नसीब समझते हैं की मौला ने हमें गाने का गला दिया है। कला उसने दी है, तो कला को मान भी वही दिलायेगा, ऐसा हमारा विश्वास है।

(Sad music plays in the background of the show)

Judge 1: आपके ख्याल जानकार हमें बहुत ख़ुशी हुई भानु जी। यही उम्मीद करते हैं की इस show के ज़रिये आपको और आगे जाने का मौका मिले, और हमारी देश की जनता भी जाने की हमारे देश में talent कहाँ कहाँ बसा हुआ है। 

Judge 2: आइये भानु जी आ कर अपना medal ले जाइये। हम आपसे अब सीधा next round में मिलेंगे। आईये।

Judge 1: आइये भानुप्रसाद जी, आके अपना इनाम ले जाइए...

Judge 2: आइये भानु जी...

(Everybody speaks in chorus, "आइये भानु जी...")


***

"उठ जाइए, उठ जाइए, ज़नाब! मने तंग ना कर। अब उठ भी जा, काम पे नहीं जाना क्या। अरे train निकल जायेगी, उठ जा। उठ जा, उठ जा!..."


(Bhanu lazily opens his eyes to see his friend Ratan standing near him, peeping right into his face. He is visibly angry and frustrated. Dressed in the same traditional Rajasthani attire as Bhanu's, Ratan is holding a Sarangi against his shoulder.)


Bhanu: अरे तू के कर रहा है अठे!? (what are you doing here)


Ratan: जो सवाल मने पूछना चाहिए वो तू पूछ रहा है? तू ये बता कि तू अभी तक चारपाई पर लेटा के कर रहा है? तने याद नहीं, हमें 9 बजे की train में जाना था गाने बजाने?


Bhanu: (Very confused and puzzled) तो क्या मै TV program में गाना नहीं गा रहा था?


Ratan: TV program? हे म्हारा राम, तू और तेरे सपने। अब काम पे चलना है कि ना? या यहीं बैठे ख्याली पुलाव खाना है?


Bhanu: (still lost in thought) तू जा, मै आज नहीं आऊंगा।


Ratan: अरे पर क्यूँ?


Bhanu: वैसे ही, मने दर्द हो रहा है।


Ratan: दर्द? कैसा दर्द?


Bhanu: सपने टूटने का दर्द।

***





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